मामा की बेटी की चूत चुदाई

मैं चंडीगढ़ से हूँ, मेरा नाम राहुल है और मैं एक कंपनी में काम करता हूँ. मेरे यहाँ मेरे मामा की लड़की शगुन गर्मी की छुट्टियों में हर साल आती रहती थी. वो मेरे मामा की बड़ी लड़की है. उसका रंग थोड़ा सांवला जरूर है.. लेकिन वो बहुत ही सुंदर और सेक्सी है।
हम दोनों भाई बहन आपस में बहुत क्लोज हैं एक दूसरे के और बहुत बातें किया करते हैं! उसके सीने पर बड़े-बड़े बूब्स हैं, फिगर उसका इतना मस्त कि क्या बताऊँ दोस्तो! उसे देखकर मेरा लण्ड हमशा खड़ा हो जाता था. मैं उससे बातों-बातों में ही उसके बूब्स और गांड को स्पर्श कर देता था लेकिन वो कुछ रिएक्शन नहीं देती थी तो मुझे और भी हिम्मत आ जाती थी.

मैं रात को कभी कभी उठकर उसके पास जाकर उसकी चूत पर हाथ रख देता था और उसकी चूत पर हाथ से सहलाता था, फिर मैं उसकी चूत की भीनी-भीनी खुशबू को मजे से सूँघता था। मुझे सच में बहुत मजा आता था और जब वो कुछ हरकत करती तो मैं एकदम कमरे से भाग जाता था.

उसकी कमसिन अदा मुझे बहुत गर्म कर चुकी थी. वो एक बहुत ही नाज़ुक माल है, मैं उसे चोदने के लिए बहुत बेकरार हो चुका था लेकिन वो मेरी मामा की लड़की है तो ज्यादा कुछ नहीं कर सकता सोचने के अलावा!

एक दिन मेरे घर में कुछ प्रोग्राम था तो काफी लोग आये हुए थे, भी मामा मामी के साथ आई हुई थी. उसकी उम्र तब 19 साल रही होगी। उसने अभी तभी कॉलेज में एडमिशन लिया था.

हमारा घर छोटा है तो सोने के लिए जुगाड़ लगाया जा रहा था. शायद मुझे शगुन के साथ सोने का मौक़ा मिल जाए इसीलिए मुझे लगा कि शायद आज कुछ बात बन जाएगी!
और किस्मत को भी यही मंजूर था!

रात को मेरी माँ ने मुझे और शगुन को एक साथ सोने के लिए छत पर भेज दिया और साथ में मामा और मामी को भी भेज दिया! ऊपर एक कमरा था छोटा सा और उसके सामने खुली छत थी. मामा मामी खुली छत पर सो गए, हम दोनों अंदर कमरे में पंखा चला कर लेट गए. शगुन और मैं एक ही चारपाई पर थे क्योंकि वहां एक ही चरापई थी. वो मेरी तरफ पीठ करके सोई. उस दिन उसने पजामा और शर्ट पहना हुआ था। वो पीछे से बहुत सुंदर लग रही थी। उसकी बड़ी बड़ी गांड और गहरी दरार मुझे उत्तेजित कर रही थी। मुझे आज इच्छा पूरी करनी ही थी क्योंकि मुझे पता था आज नहीं हुआ तो कभी नहीं होगा … इसलिए मेरी आँखों से नींद गायब थी।

रात के करीब 12 बजने वाले थे और घर के सारे लोग धीरे-धीरे सोने लगे लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। मेरे दिमाग में तो बस एक ही बात आ रही थी कि क्या पता आज मेरी किस्मत खुल जाये!
मैं धीरे से उसके पीछे से सट गया, उसके शरीर की खुशबू मुझे पागल करने लगी, उसकी गांड की नर्माहट मुझे महसूस होने लगी। मैंने हिम्मत करके आज फिर से हाथ धीरे से उसके सीने पर रख दिया. इतना ही मेरे लिए बहुत था। मेरा लण्ड खड़ा हो गया था। धीरे से हिम्मत करके मैंने उसका एक मम्मे को दबाया.. बहुत ही कठोर स्तन थे।

आज मेरे लिए घर का माल था और मैं धीरे-धीरे उसके संतरे दबाने लगा। सारे लोग सो गए थे, सिर्फ़ मैं ही जाग रहा था। अब मैंने उसकी टीशर्ट को उपर कर दिया. नीचे उसने कुछ नहीं पहना था। उसके दोनों चूचे आज़ाद हो गए और मैंने उत्तेजना में आकर उसके चूचे ज़ोर से दबा दिए। उसके मुंह से सिसकारी निकल गई.. मैं थोड़ा डर गया लेकिन यह बात साफ हो गई कि शायद वो भी जाग रही थी।
मेरे लिए अब और भी आसान हो गया था। मैं उसकी गांड को सहलाने लगा. उसकी बड़ी सी गांड को दबाने में बहुत मज़ा आ रहा था।

अब मैंने धीरे-धीरे उसके पजामे को थोड़ा नीचे कर दिया और उसकी छोटी सी चड्डी में से उसकी गांड बाहर झाँक रही थी। उसकी चड्डी की इलास्टिक में मैंने हाथ डाल दिया और उसकी चिकनी गांड को सहलाने लगा।
मासूम सी लड़की आज मेरे हाथ में थी. मेरा लण्ड ज़ोर-ज़ोर से हिचकोले ले रहा था और बाहर आने के लिए बेकरार था.

मैंने अपनी निक्कर धीरे से पैरों से निकाली और उसकी चड्डी की इलास्टिक में हाथ डाल कर उसे भी उसके चूतड़ों से नीचे को सरकाया। अब मेरे मामा की बेटी यानि मेरी ममेरी बहन के कूल्हे नंगे हो गए और मेरे हाथ उसकी भरी हुई टाँगों पर आ गए. उसने अपनी गांड को ऊपर को किया और उसकी चड्डी पूरी निकालने में मेरी मदद की।

अब हम दोनों सिर्फ़ ऊपर के कपड़े पहने हुए थे नीचे से हम दोनों नंगे थे! उसकी मर्जी जान कर उसे मैंने चित लिटा दिया। अब मेरे सामने चोदने लायक कोमल माल था। मैंने उसकी चूत को टटोल कर देखा, उसकी चूत पर घुँघराले रेशमी बाल उगे हुए थे, उसकी चूत फूली हुई, बिकुल गर्म गुलाबजामुन की तरह लग रही थी। चूत के होंठ बड़े-बड़े थे.. आपस में चिपके हुए थे, उसकी चूत के ऊपर एक बड़ा सा दाना था। मेरी बहन एक मासूम तथा नाज़ुक माल था। मैं आज बहुत खुश था.

फिर मैंने अपने हाथों से उसकी चूत के होंठों को अलग किया तो पाया उसकी चूत से पानी निकल रहा था। मैंने उसका एक पैर साइड पर सरका कर उसकी जांघों को चौड़ा किया और उसकी नाज़ुक चूत पर अपना लंड रख दिया.
हाय क्या गर्म चूत थी उसकी. आज मेरे घर का माल मेरे हाथ में था। मैंने मुँह से थूक निकाला और उसकी बुर के होंठों को पूरा गीला कर दिया और मेरा सुपारा उसकी मासूम कली की चूत के मुँह में लगा कर धीरे से ज़ोर लगाया. उसकी चूत ने जगह दे दी और मेरा आधा सुपारा उसकी चूत में फंसा दिया।

अब लौड़े ने अपनी जगह निशाने पर ले ली थी। मैंने ज़ोर से एक धक्का मारा.. उसकी कराह ‘आह्ह..’ निकल गई। मेरा आधा लण्ड शगुन की चूत में समा चुका था। तो मुझे साफ पता लग गया कि मेरी बहन पहले भी अपनी चूत चुदवा चुकी है.

फिर मैं जरा रुक गया.. उसके रसीले स्तन सहलाने लगा उसकी चूत तथा उसकी चूत के बालों में उंगली सहलाने लगा. शगुन की चूत में मेरा आधा लण्ड फंसा हुआ था. मैं उसका पेट, नाभि, स्तन सहलाता रहा और अपने लौड़े को धीरे-धीरे हिलाता हुए अंदर भी रहा। इस तरह मैंने पूरा लण्ड अपनी बहन की चूत में धकेल दिया.

मामा मामी बाहर सोये हुए थे और मैं अपने उनकी बेटी की चूत में अपना पूरा लंड घुसा चुका था. उसकी चूत ने मेरे लण्ड को जकड़ लिया था. मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे मेरी बरसों की तमन्ना पूरी हो गयी हो।

अब मैंने हल्के हल्के झटके मारने शुरू कर दिए. शगुन की धीमी धीमी सिसकारियां निकल रही थी लेकिन वो अभी भी सोयी हुई का नाटक कर रही थी. लेकिन उसकी गीली गर्म चूत बता रही थी कि मेरी बहन की चूत को भी के लंड से मजा मिल रहा है.
क्या मस्त चूत थी शगुन की..! मुझे बहुत मजा मिल रहा था.. मैं उसकी चिकनी चूत और चूचों को सहलाता गया और चूत में धक्के मारता गया और वो भी मजे लेती रही!

फिर मैंने उसको अपनी बांहों में लेकर दूसरी तरफ मुँह करके से एक करवट से लिटाया. मैंने अपने लण्ड पर ढेर सारा थूक लगाया. उसके कूल्हों को मेरी तरफ खींच कर बाहर को निकाला, फिर उसको पास करके लण्ड को चूत के छेद पर रखकर धक्का मारा और अपना पूरा लण्ड उसकी चूत में फिर से फंसा दिया।

अब मैंने उसकी टीशर्ट को पूरा उतार दिया और फिर अपनी को भी. मैं उसको बांहों में लेकर चूमता हुआ उसे पीछे से हचक कर चोदने लगा।
अब उसे भी मज़ा आ रहा था और वो मुंह से आह्ह उम्म्ह… अहह… हय… याह… आह्ह करने लगी. अब उसके सोये होने के नाटक का भी अंत हो चुका था.

मैंने उसकी चूत में अपना लंड दस मिनट तक अन्दर बाहर किया! वो अकड़ने लगी थी जिससे मुझे अहसास हो रहा था कि शायद वो झड़ने वाली है. और उसी टाइम वो झड़ गयी और मुझे उसका रस अपने लंड पर महसूस होने लगा क्योंकि अब लंड और आसानी से अंदर बाहर हो रहा था.

फिर मैंने देर न करते हुए उसके दोनों स्तनों को पकड़ कर आख़िरी धक्के मारे जोर लगा कर और ढेर सारा वीर्य उसकी चूत में गिरा दिया।

और सच में नहीं बता सकता, क्या मजा आ रहा था मुझे, आज मैंने अपनी एक पुरानी इच्छा पूरी की थी मैं अत्यधिक प्रसन्न था. मैंने अपना लंड चूत में से बाहर खींच लिया और बहन को सीधी करके उसके होंठों को चूमने लगा.
मैंने उससे पूछा- शगुन, मजा आया?
उसने गर्दन हिला कर हाँ में जवाब दिया. उसके बाद हम दोनों ने कुछ बातें की और फिर मैंने एक राउंड और मारने को कहा लेकिन उसने मना कर दिया।

अब शगुन मेरे लंड का स्वाद चख चुकी थी तो कोई चिंता की बात नहीं थी अब तो रास्ता खुल चुका था, मुझे पता भी चल चुका था कि मेरी बहन चालू किस्म की है. अब तो वो जब चाहे मुझे हासिल होने वाला माल बन चुकी थी।

फिर मैंने उसको दो दिन तक अच्छे से चोदा और हम दोनों ने बहुत मजे लिए एक दूसरे के!
और उसके बाद जब भी वो हमारे घर आती तो मैं उसको पूरी रात चोदता!

फिर कुछ टाइम बाद उसकी शादी हो गयी और फिर मैं उसको कभी नहीं चोद पाया उसके बाद!
मेरी लाइफ कीमें रिश्तेदारी में शगुन सिर्फ ऐसी लड़की थी जिसके साथ मैंने सेक्स किया. उसके अलावा मैंने और कई रिश्तेदारी वाली लड़कियों पर ट्राई किया लेकिन कोई और चूत नहीं मिली मुझे रिश्तेदारी में!
और उससे पहले मैंने अपनी एक गर्लफ्रेंड को चोदा था. वो कभी और बताऊँगा.

तो दोस्तो, आपको मेरी स्टोरी कैसी लगी, मुझे जरूर बताना ईमेल करके … और कुछ गलती हो गयी हो तो वो भी बताना ताकि आगे कभी कोई स्टोरी होगी तो ध्यान रख सकूँ!
धन्यवाद.