कॉलेज टीचर ने मुझसे अपनी चूत की प्यास बुझवायी

दोस्तो, मेरा नाम रोहित है. यह कहानी तीन साल पुरानी है. यह घटना मेरे और मेरी मैम के बीच की है. मैम का नाम बदला हुआ नाम कंचन है, उनकी उम्र तीस साल के आस पास है. मैम दिखने में बड़ी मस्त हैं. उनका 34-32-36 का फिगर भी एकदम मस्त है.

हुआ यूं कि मैं जोधपुर की एक कंपनी में जॉब करता था. मुझे एक कॉलेज की लैब के कंप्यूटर सही करने थे. तो मैं वहां पर काम कर रहा था तभी वहां लैब का काम संभालने वाली मैम आईं और मेरे से इधर उधर की बात करने लगीं.

फिर ऐसे ही उनसे जान पहचान हो गई और हमारी बात होने लगी. तभी उन्होंने कहा कि आपकी कोई गर्लफ्रेंड है क्या?
उनकी एकदम से इस तरह की बात करने लग जाने से मैं चौंक गया कि मैम ये क्या कह रही हैं. मैं उनकी तरफ हक्का बक्का सा देखने लगा.

तभी उन्होंने फिर से पूछा कि क्या हुआ बताओ ना?
मैंने कहा- नहीं … मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.
उन्होंने कहा- लेकिन तुम तो इतने बड़े हो गए हो और अच्छे भी लगते हो … फिर क्यों नहीं है?
मैंने सहज भाव से कहा कि आज तक मैंने कभी भी ऐसा सोचा भी नहीं था.
इसी तरह की बातचीत होती रही. वे मुझे हैंडसम बोल रही थीं और मैं उनसे खुलता जा रहा था.

कुछ देर बाद हम दोनों दूसरी बात करने लगे. कुछ देर बाद मैम ने मुझसे कहा कि तुम मुझे अपना नंबर दे दो ताकि मुझे कभी कंप्यूटर में कोई प्राब्लम होगी तो तुम्हें कॉल कर लूँगी.
मैंने नम्बर दे दिया. फिर मैं वहां दो दिन काम करके चला आया.

कुछ दिन बाद उनका मुझे कॉल आया और उन्होंने बताया कि कंप्यूटर में कुछ प्राब्लम आ गई थी. मैंने उन्हें फोन पे बता उस समस्या का हल बता दिया. फिर मैम ने मुझसे थोड़ी देर इधर उधर की बात की और फोन रख दिया. उनकी बातों से मुझे लगा कि वे मुझे बुला कर कंप्यूटर ठीक करवाना चाहती थीं.

कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए थे. मैम से फोन पे बात होती रही और हम दोनों में अच्छी दोस्ती हो गयी.

फिर एक दिन उनका कॉल आया. उनसे बातचीत शुरू हुई. चूंकि अब तो गाहे बगाहे मैम के फोन आते रहते थे और मैम से मेरी हंसी मजाक होती रहती थी.

उस दिन जब उनका फोन आया, तो हम दोनों ने बात बात में मूवी जाने का पक्का कर लिया. ठीक समय पर मैं सिनेमा हॉल पहुंच गया. मैम मुझे वहीं इन्तजार करते हुए मिल गईं. जब वो मूवी देखने आई थीं, तो क्या मस्त माल लग रही थीं. मैम लाल साड़ी में कयामत ढा रही थीं. उन्हें यूं सजा धजा देख कर मैंने उनकी तारीफ़ भी की. इससे मैम को अच्छा लगा और उन्होंने एक बार फिर मेरे लिए तारीफ़ वाले शब्द कहे.

इसके बाद हम दोनों मूवी देखने थियेटर में जाने लगे तो मैम ने मेरे हाथ में अपना हाथ ले लिया था. उनके हाथ का यूं स्पर्श पाकर मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था. मैंने उनके हाथ को ठीक से पकड़ा तो मैम ने अपनी उंगलियां मेरी उंगलियों में फंसा दीं.
मैंने उनकी तरफ देखा तो वे मुस्कुरा दी. मैं उनसे सट कर चलने लगा.

हम दोनों हॉल में अन्दर आ गए और अपनी सीट पर बैठ गए. हमने मूवी देखनी शुरू की. फिर थोड़ी देर बाद मैंने हिम्मत कर के बीच बीच में मैंने उनके धीरे धीरे हाथ से हाथ लगाना शुरू कर दिया. उनका हाथ इतना सॉफ्ट था, जैसे मखमल हो. मुझे मज़ा आने लगा पर मैं सजग था कि मैम कुछ कह ना दें.

लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की और न ही कोई विरोध किया. इससे मेरी हिम्मत बढ़ गयी और मैं धीरे धीरे हाथ बार बार लगाने लगा. तभी उन्होंने धीरे से मेरे कान में कहा कि यहां ज्यादा नहीं … सब देख रहे हैं.

मैंने इतना सुना तो मुझे समझ आ गया कि रास्ता साफ़ है, ये खुद मुझसे लगना चाहती हैं. अब हॉल के अंधेरे का लाभ उठा कर मैंने फिर से हाथ चलाना शुरू कर दिया. पहले तो उनके मम्मों पर हाथ लगाया, फिर धीरे धीरे हाथ नीचे ले गया. मैम को भी मज़ा आने लगा. फिर थोड़ी देर के यूं ही रगड़ने और सहलाने के कार्यक्रम के बाद इंटरवल हो गया. हम दोनों बाहर आए तो देखा अंधेरा गहरा हो गया था.

उन्होंने कहा कि फिल्म में मजा नहीं आ रहा है. यहीं थोड़ी दूर पर मेरी सहेली का फ्लैट है, वहां चलते हैं.
मुझे खुद उनकी फिल्म बनाने का मन हो रहा था. मैंने हामी भर दी और हम दोनों मेरी कार में बासनी एरिया में चले गए. रास्ते में उन्होंने फोन पर अपनी सहेली से बात कर ली थी. वो शायद फ्लैट पर नहीं थी, लेकिन उसने चाभी किधर से मिलेगी ये बता दिया था. मैम की फ्रेंड शहर से दो दिन के लिए कहीं बाहर गई हुई थीं.

हम दोनों उस फ्लैट में चले गए. हम थोड़ा फ्रेश हुए. फिर उन्होंने अपने घर और मैंने अपने घर फोन कर दिया कि आज घर नहीं आएंगे … फ्रेंड के यहां हैं. फिर हमने होटेल से खाना ऑर्डर किया और यूं ही एक दूसरे से गरमगरम बातें करते हुए हंसी मजाक करते रहे.

कुछ ही देर में खाना आ गया. पहले हम दोनों ने खाना खाया. फिर हम हॉल में टीवी देखने लगे. टीवी में मस्त रोमांटिक मूवी आ रही थी. उसे देखते देखते हम दोनों को भी मज़ा आने लगा.

फिर धीरे धीरे मेरा हाथ उनके मम्मों पर चला गया और ब्लाउज के ऊपर से ही मैं मैम के मम्मे मसलने लगा. मैम ने अपना मेरे लंड पे रख दिया और वे पैंट के ऊपर से ही मेरा लंड मसलने लगीं. इसके बाद चुदास बढ़ने लगी तो मैंने उनका ब्लाउज खोल दिया. उन्हें प्यार से चूमने लगा. धीरे धीरे कपड़े उतरने लगे. मैंने मैम की साड़ी भी उतार दी, अब मैं उन्हें लाल रंग की ब्रा और पेंटी में देख कर पागल सा हो गया था.

तभी मैम ने कहा- चलो बेडरूम में चलते हैं.
मैंने उन्हें गोद में उठा लिया और बेडरूम में ले आया. उनका फूल सा बदन मुझे बड़ा मस्त लग रहा था. मैम भी मेरे गले में बांहें डाले मुझे चूम रही थीं.

मैंने कुछ देर यूं ही अपनी गोदी में लिए मैम के होंठों को चूमा. फिर मैम को बेड पर लेटा कर उन्हें होंठों पर किस करने लगा. धीरे धीरे मैं उनको चूमते हुए उनकी नाभि पे आया. वो एकदम से सिहर उठीं और मैम ने मेरे सर पर हाथ रख कर मुझे सहलाना शुरू कर दिया था.

फिर मैं नाभि से और नीचे आ गया. उनकी पेंटी पूरी गीली हो चुकी थी. मैंने पेंटी की इलास्टिक में उंगलियां फंसा कर चड्डी को नीचे खींच दिया. मैं मैम की चूत की महक ले रहा था और मेरी गर्म सांसें उनकी चूत पर लग रही थीं.

मैम ने मेरा सिर पकड़ कर अपनी चूत पर लगा दिया. पहले मुझे चूत का स्वाद थोड़ा अजीब सा लगा, फिर मज़ा आने लगा.

कोई दो मिनट में कंचन मैम से रहा नहीं गया और उन्होंने उठ कर मेरी पेंट और चड्डी उतार दी. मेरा खड़ा लंड उनको नमस्ते करने लगा तो लंड को हाथ में ले के मैम उसे आगे पीछे करने लगीं.

मैं अभी कंचन मैम के हाथों का मजा ले ही रहा था कि अचानक से उन्होंने मेरे खड़े लंड को अपने मुँह में ले लिया. मैं तो जैसे सातवें आसमान में उड़ने लगा था. मुझे ऐसा लगा कि आज तो बिन मांगे मुराद पूरी हो रही थी.

कुछ ही देर बाद हम दोनों 69 की अवस्था में आ गए और हम एक दूसरे के सामान को रगड़ने चूसने लगे.

लंड चूत की चुसाई मस्ती से चलने लगी. हम दोनों पूरी तन्मयता से एक दूसरे के लंड चूत को चूसे जा रहे थे. कुछ ही देर में कंचन मैम अकड़ने लगीं और उन्होंने अपना पानी छोड़ दिया.

वो दो पल रुक कर फिर से मेरा लंड चूसने लगीं. थोड़ी देर बाद जब मैं झड़ने ही वाला था, तो मैंने उनसे कहा- मेरा होने वाला है.
कंचन मैम ने लंड को मुँह से चचोरते हुए ही इशारे से कहा कि मेरे मुँह में ही झड़ जाओ.

कुछ ही देर में कंचन मैम के मुँह में ही झड़ गया. फिर हम दोनों बाथरूम गए. हमने एक दूसरे को साफ किया. उधर लंड को साफ करते करते कंचन मैम ने फिर से मेरे लंड को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगीं.

दस ही मिनट में मेरा वापस लंड खड़ा हो गया. मैं भी उनके बोबे दबाने लगा, उन्हें भी मज़ा आने लगा. हम दोनों फिर से बेडरूम में आ गए. बेड पे आकर मैंने अपना मुँह उनकी चूत पे रखा और जीभ को अन्दर तक डाल कर घुमाने लगा.

अब कंचन मैम ने कहा- यार अब रहा नहीं जाता … जल्दी से अन्दर डाल दो.
मैंने मैम की टांगें फैला दीं और अपना लंड हाथ से हिला कर चूत की फांकों में फेरा. मैम ने नीचे से गांड उठा कर इशारा दिया तो मैंने अपने लंड का टोपा उनकी चूत पे रख कर जोरदार धक्का दिया. लंड एकदम से घुसा तो मैम की चीख निकल गयी.

मैंने झट से उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए. मैम ने मुझे अपनी बांहों में कस लिया तो मैंने एक और धक्का दे दिया. इस बार मेरा पूरा लंड चूत में अन्दर तक घुस गया. कंचन मैम की आंख से आंसू आ गए.
मैंने पूछा, तो उन्होंने बताया कि दो साल से सेक्स नहीं किया है इसलिए दर्द हो रहा है.
हम दोनों वापस किस करने लगे. मैं चुम्मी के साथ में धक्के भी लगाने लगा.

थोड़ी देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा और वो कमर हिला के साथ देने लगी. चूंकि मैं एक बार झड़ चुका था तो अबकी बार मुझे टाइम लगना स्वभाविक था. इस बीच वो दो बार झड़ गयी थी. मैं धक्के लगाता रहा. पन्द्रह बीस धक्के के बाद जब मेरा होने वाला था, तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.

अब तक कंचन मैम एक बार और झड़ चुकी थीं. मैंने कंचन मैम से कहा- मैम मेरा होने वाला है … कहां डालूँ?
मैम ने कहा- अन्दर ही डाल दो … मैं बाद में दवाई ले लूँगी.

फिर चार पाँच धक्के लगाने के बाद मैंने उन्हें कसके जकड़ लिया. कंचन मैम दुबारा अकड़ने लगीं और उन्होंने भी मुझे कसके पकड़ लिया. मैम ने उत्तेजना में मेरी पीठ पर नाख़ून चुभो दिए. इतने में हम दोनों एक साथ फ्री हो गए और हम दोनों ऐसे ही एक दूसरे से चिपक कर लेटे रहे.

वो मुझे चूमते हुए बोलीं- आज दो साल बाद मुझे शान्ति हुई … सच में मज़ा आ गया.
कुछ देर यूं ही लेटे रहने के बाद हमने टाइम देखा तो बारह बज चुके थे.

चुदास भड़कने लगी तो हम दोनों ने एक राउंड और लगाया. फिर थकान के चलते कब हम दोनों को नींद आ गयी, पता ही नहीं चला. रात को मुझे कुछ महसूस हुआ तो मेरी आंख खुल गई. ये महसूस हुआ कि कोई मेरा लंड सहला रहा है. मैंने लगा उठ कर देखा, तो कंचन मैम ने फिर से मेरा लंड मुँह में ले लिया था और वो लंड चूसने में लगी थीं.

सीन देखा तो मेरा लंड भी सलामी देने लगा. मैंने कंचन से कहा- मुझे तुम्हारी गांड मारनी है.
पहले तो उन्होंने मना कर दिया. मैम ने बोला- मैंने पहले कभी गांड नहीं मरवाई है.

पर मेरे ज़ोर देने पर मैम गांड मराने के लिए मान गयी. मैम ने बोला- पहले कुछ चिकनाई लगा लो.

मैंने पास में पास पड़ी कोल्ड क्रीम उठा ली और थोड़ी क्रीम उनकी गांड पर लगा दी, थोड़ी मैंने अपने लंड पर भी लगायी. फिर मैंने लंड को मैम की गांड पर रखा और ज़ोर लगा दिया. पर लंड फिसल गया. तो मैंने दुबारा और क्रीम लगा कर एक झटका मारा, तो टोपा अन्दर घुस गया.

अभी टोपा ही अन्दर गया था कि मैम चिल्लाने लगीं और उनकी आंख से आंसू आने लगे. मैम दर्द से कराहते हुए बोलीं- लंड बाहर निकालो … नहीं तो मैं मर जाऊँगी.

मैं थोड़ा रुक गया. फिर दुबारा थोड़ा तेल डाला और ज़ोर लगाया तो मेरा पूरा लंड मैम की गांड में अन्दर चला गया. मैम को अभी भी दर्द हो रहा था. पर थोड़ी देर बाद उन्हें भी मज़ा आने लगा और वो भी गांड उछाल कर मेरा साथ देने लगीं.

कुछ देर मैम की गांड मारने के बाद मेरा काम होने वाला था, तो मैं उनकी गांड में ही झड़ गया.
फिर हम दोनों को कब नींद आ गयी, पता ही नहीं चला.

यह थी मेरी सेक्स कहानी … आपको कैसी लगी, मुझे मेल करके ज़रूर बताना.